कभी अलग न हुए
#hindiwriter#
पतझड़ गुज़री, सावन गुज़रा,
न जाने कितने मौसम गुज़रे,
एक तेरी यादों का मौसम बस न गुज़रा।
तुझे देखने की चाह में आँखें तरसती रहीं,
तुझे हाथ उठाकर दुआ में बस माँगा।
तू गुज़रे ज़माने-सी बात हो गया,
मेरे आज से जाने कब बीते कल में चला गया।
मुझे आस रही तेरे लौट आने की।
तेरी उपस्थिति हमेशा मेरे भीतर रही,
मेरे अस्तित्व की छाँव बनकर
मुझे ज़िंदगी की धूप से बचाती रही।
मेरे पैर जब भी जले,
तू मेरे भीतर की ठंडक बनकर मुझे बचाता रहा।
तू मिला और फिर कभी नहीं मिला,
तू जुदा हुआ और फिर कभी जुदा न हुआ।
तू मेरे हर पल में रहा।
मैं जब अकेली रही,
मेरा हाथ पकड़कर चलता रहा।
मेरी राहों के काँटों को हटाता रहा,
मेरी आँखों के आँसू पोंछता रहा।
तू उपस्थित रहा मेरे हर पल में।
तू और मैं मीलों की दूरियों पर भी
साथ जीते रहे, साथ मरते रहे।
बिना हाथ थामे हमसफ़र बने रहे,
बिना आँखों में देखे एक-दूसरे को महसूस करते रहे।
बिना बात किए एक-दूसरे के शब्द सुनते रहे।
तू—बस तू होकर तू ही रहा,
और मैं भी तेरे जैसी हो गई।
मैं भी तेरे अस्तित्व की परछाईं बनकर
तेरे साथ रही।
तू जब कमज़ोर पड़ा,
मैं भी तेरी हस्ती का सामां बनकर तेरे साथ रही।
अकेली तन्हा रातों में जब तेरी आवाज़ लड़खड़ाई,
मैं भी तेरे अंतर्मन की आवाज़ बनकर तेरे साथ रही।
हम दोनों मीलों के फ़ासलों पर भी एक रहे।
हम बिछड़े भी,
तो फिर कभी अलग न हुए।
अलग न हुए।
“काश तुम हमारे होते”
“काश तुम हमारे होते”
ज़िंदगी की धूप में जलते मेरे पैरों के नीचे,
काश पैर तुम्हारे होते।
अपनेपन की ठंडक में
यह ताप सहना थोड़ा तो आसान होता।
मजबूरियों की राहों में
हमराही बनकर तुम
रास्तों को आसान कर देते।
ऊबड़-खाबड़ से पथ पर
परेशानियों के चुभते काँटों को निकालने के लिए,
काश हाथ तुम्हारे होते।
तुम्हारे कोमल हाथों के स्पर्श से
तकलीफ़ों का बहता हुआ ख़ून
शायद थोड़ा धीमा पड़ जाता।
वक़्त से बिछुड़े हुए,
आशाओं के टपकते हुए आँसू लिए,
बंद आँखों को जब भी खोलते,
काश दृश्य तुम्हारे होते।
किस्मतों की तिजोरी में,
हाथों की लकीरों में,
काश हाथ तुम्हारे होते।
काश...
तुम सबके होकर भी
बस हमारे होते।
धूप और छाँव
#धूप और छाँव#
#Life Story#
ऐसा लगता है ज़िंदगी धूप और छाँव के बीच चल रही है।
छाँव की तलाश में मैं जिस ओर भी कदम बढ़ाती हूँ,
वह छाँव वहीं से मेरे कदमों के पीछे लौट जाती है।
मानो ईश्वर मेरे पाँव इस जीवन की धूप में जलाना चाहता है।
उसके ताप को सहते हुए, खामोश मैं आगे बढ़ती जाती हूँ।
उम्मीदों की रोशनी जैसे धुंधली हो गई है,
ज़िंदगी का दीपक बुझने की कगार पर है…
फिर भी कुछ है जो मुझे संभाले रखता है—
मेरा हौसला, मेरी खामोशी,
और मेरे अंतरमन में जलता उम्मीदों का दीपक।
ज़िंदगी उतनी कठिन भी नहीं,
पर उतनी आसान भी कहाँ है…
लू के थपेड़ों सा अकेलापन चारों ओर घेर लेता है,
और शब्द जैसे खुद ही खामोश रहना चाहते हैं।
अब कुछ कहना व्यर्थ सा लगता है,
शब्दों का बखान अर्थहीन प्रतीत होता है।
शायद अर्थ तो इसमें छुपा है—
कि बस चुप रहा जाए,
और ज़िंदगी का दर्शक बना जाए।
छाँव की ओर भागना नहीं,
धूप में खड़े रहकर अपनी बारी की प्रतीक्षा करना है।
वक़्त बदलता है—
कभी शोर मचाकर,
तो कभी खामोशी से।
दिल के उस दीपक को जलाए रखना ज़रूरी है,
क्योंकि बिना उम्मीदों के जीवन चलता नहीं।
अंतरमन की रोशनी के बिना
संघर्षों में टिके रहना आसान नहीं होता।
मेरा हौसला, मेरी ताकत—सब कुछ मेरे भीतर है,
फिर भी मैं उसे बाहर ढूँढती हूँ।
जो दृश्य होते हुए भी अदृश्य है,
उसे मैं बाहरी दुनिया में खोजती हूँ।
जो भीतर है, उसे बाहर ढूँढना व्यर्थ है…
पाँव धूप में जलते हैं,
और ज़िंदगी मुझे परीक्षा के अंतिम पड़ाव तक
अकेले ही लेकर चलती है।
लोग मेरे आसपास होते हैं,
पर मैं फिर भी अकेली हूँ।
और जो आसपास भी नहीं,
वह हर जगह है—
वह सर्वत्र है, वह मुझमें है।
हौसलों के पंख झुलसते हैं,
फिर भी मैं उन्हें फैलाए रखती हूँ,
खुद की रक्षा करती हूँ।
मेरा अस्तित्व ही मेरी पहचान है,
मेरा होना ही मेरे होने का प्रमाण है।
मैं हूँ… और रहूँगी—
क्योंकि मुझे अपने होने पर विश्वास है।
ज़िंदगी जैसी भी हो,
वक़्त जैसा भी हो—
मैं वक़्त से आगे बढ़ जाऊँगी,
और एक दिन…
मैं अपनी छाँव तक पहुँच जाऊँगी।
प्रेम और ईश्वर
# Spiritual Thoughts #
Life story
दिल की आवाज में
Life Story
रात भी वही है,
वक्त भी वही है,
शाम कुछ बदली सी है..
एहसास कुछ बदले से हैं..
कुछ खोया हुआ सा आसमान..
कुछ बिखरा सा है तारों के बीच में..
उदास सा है जहाँ..
तू जाने कहाँ?
तेरी मौजूदगी के निशान मिटते नहीं..
तेरा अस्तित्व मिटता नहीं है..
तू रह जाता है इस पल में कहीं..
हवाओं की सरसराहट में,
संगीत की धुन में..
आँखों के कोनों में..
अपनेपन के एहसास में।
दिल की याद में,
तारों की सौगात में..
खामोशी में सिमटी हर बात में,
तू कहीं है किसी दिल की आवाज़ में।
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#Voice of Your Heart # Zindgi ki Baate
मौन का संवाद
#Personal Thought#
Life poetry
मौन में भी संवाद होता है,
जब “मैं” और “तुम” का भेद मिट जाता है।
जब हम किसी गहरी अनुभूति में उतरते हैं,
तुम मेरे अस्तित्व के द्रष्टा बन जाते हो।
जब शब्दों की आवश्यकता नहीं रहती,
अंतरमन की संवेदनाएँ
बिन कहे ही तुम तक पहुँच जाती हैं।
जब आत्मा और परमात्मा एक हो जाते हैं,
वहाँ न तुम रहते हो, न मैं…
बस एक शुद्ध अनुभव रह जाता है।
तुम मेरे सर्वस्व में समाए हुए,
मेरी आत्मा की शुद्धि बन,
एकांत में भक्ति-रस बरसाते हो।
जब तेरा-मेरा भेद शून्य हो जाता है,
और हम एक बिंदु बन
दिव्य ज्योति में विलीन हो जाते हैं…
तब मौन का यह संवाद
मुझे गहराइयों में तुम तक पहुँचा देता है।
फिर किसी वस्तु की चाह नहीं रहती,
और जीवन का उद्देश्य स्वयं सिद्ध हो जाता है।
क्योंकि सदियों से तुम तो तुम हो ही…
पर सत्य यह भी है—
मैं भी तो तुम ही हूँ।
तुम न हो तो मैं कहाँ…
तुम न हो तो मैं कहाँ…
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#Voice of Your Heart # Zindgi ki Baate
ईश्वर की उपस्थिती सा
#Personal Thoughts# **Life quotes**
पानी के बुलबुलों में,
सूरज की रोशनी में बिखरी किरणों में,
समुंदर किनारे लहरों के सन्नाटों में—
एक रोशनी सी जलती तमस की रात में,
अंधकारमय जीवन में,
उम्मीदों की पूर्णिमा सी…
जलते हुए जीवन में अपनापन की बूंदों सी,
तेरा अस्तित्व कुछ यूँ रहा…
अनजान राहों पर, मंज़िल की ओर बढ़ते कदमों में,
रातों की खामोशी में मन में गूंजती आवाज़ों सा,
आंखों के कोरों से न टपकने वाले आँसुओं को छुपाता सा,
मुश्किलों में खुद को संभालता सा…
तेरा ईश्वर बनकर मुझमें होना कुछ यूँ—
प्रार्थनाओं में आँखें बंद करके,
हाथों को फैलाकर दुआओं सा,
मंदिर के आंगन में नंगे पाँव चलना सा,
धूप में जलते पैरों की प्रतिज्ञा सा,
जाप, तप और भक्ति सा…
तेरा अस्तित्व कुछ यूँ रहा—
ईश्वर की अनुकंपा सा,
मोक्ष की चाहत सा,
भक्ति में डूबी राधा सा,
मीरा के विष के प्याले सा…
ईश्वर की उपस्थिति सा—
मेरे ईश्वर, कुछ यूँ तू मुझमें रहा।
मैंने तुझे ढूंढा हर जगह,
और जब खुद में झांका—
तो पाया,
मेरे अस्तित्व की शक्ति बनकर
तू हमेशा मुझमें ही रहा।
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Voice of heart ❤️ आपके और मेरे दिल की आवाज।
एक ही चेतना में बहते हुए
#Personal Thoughts#
**Life quotes**
तेरे इंतज़ार में सावन गुज़रा,
पतझड़ गुज़रे, बसंत गुज़रे।
तू कब लौट आएगा?
अकेलेपन ने मुस्कानें छीनी,
रातों के सन्नाटे गुज़रे।
आँखों की खुशियाँ बिखरीं,
तुझे पाने की चाह न रही,
तुझे देखने के इंतज़ार में महीने गुज़रे।
तेरी ख्वाहिशों में वक्त गुज़रा,
यादें गुज़रीं, आँखें छलकीं।
तेरे हाथों के कोमल स्पर्श की याद में,
तेरे होने के एहसास में,
साँसें बिखरीं, उम्मीदें टूटीं।
तेरे आने की चाह में वर्षों से लम्बे दिन गुज़रे।
तेरा दर्शन आँखें बंद कर अंतरमन में हुआ,
तू जाने कैसे मेरे सर्वस्व में,
मेरे अंतरमन में ध्यान बनके, एकांत-सा गुज़रा।
तू स्वर्णिम ख़्वाब-सा मेरे मन को खुशी देता रहा,
तू ना होकर भी बस तू ही तू रहा।
मेरे अकेलेपन का साथी बनके मुझमें रहा,
मेरे अस्तित्व की अंजलि बन, मुझे खुद में भरता रहा।
तेरे आने के इंतज़ार में महीने गुज़रे,
तुझे देखने के इंतज़ार में हर शाम गुज़री।
अंतरमन का ध्यान बनके, मेरी रूह में रहा।
सर जब भी झुकाया किसी मंदिर में,
अस्तित्व की विनम्रता बनके मेरे हर भाव में रहा।
तू कहीं न होकर भी मेरे जीने की हर वजह में रहा।
तू तो तू ही है…
पर मैं भी तो तुम हूँ,
मैं भी तो तुम हूँ…
तुम न हो — तो फिर मैं कहाँ।
तू समय की सीमाओं से परे,
मेरे श्वासों में ठहर गया।
हर धड़कन तेरे नाम का जाप बन गई,
हर मौन तेरा उत्तर बन गया।
अब न दूरी रही, न चाह —
बस एक निश्चल उपस्थिति है,
जहाँ मैं भी तू हूँ, और तू भी मैं।
ना अंत, ना आरंभ —
सिर्फ़ हम हैं,
एक ही चेतना में बहते हुए।
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Voice of heart ❤️ आपके और मेरे दिल की आवाज।
गहरे कौन है ?
#Personal Thoughts #
गहरे कौन है, रातो के सन्नाटे या जिंदगी के..
रातो के सन्नाटे खामोशियो को पुकारते है,
जिंदगी के सन्नाटे अपनों को पुकारते हैं..
दिल चिल्लाता है, आवाज़ें बहार आती नहीं हैं।
आँसू पलकों तक सिमट जाते हैं।
एक बनावटी मुस्कान हर चेहरे को नज़र आती है।
मुस्कुराहटो के पीछे गम कौन जान पाता है।
गहरे ज्यादा जिन्दगी के सन्नाटे है..
रातो के सन्नाटे सुबह होने पर ख़त्म हो जाते हैं।
जिंदगी के सन्नाटे अपनों को तलाशते तलाशते,
कभी खत्म नहीं होते।
रिश्ते के बोझ जीवन को बोझिल किये हुए है,
अपनेपन का हल्कापन कहीं मिलता नहीं।
गहरे कौन है रातो के सन्नाटे या जिंदगी के?
आँखों की उदासी, जिंदगी का रंग..
उजड़े हुए से दिन और रातें..
अश्को की नमी, अकेलेपन की पीड़ा।
किसी को गले लगाकर आंसू बहाने की चाह,
किसी की कैद एन सांसो पर..
जिंदगी इतनी मजबूर तो नहीं थी, जितनी हो गई है..
अपनापन बिखरा, मैं बिखरी और एहसास बिखरे,
गहरा कौन है रातों के सन्नाटे या ज़िन्दगी के।
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Voice of heart ❤️ आपके और मेरे दिल की आवाज।
आस लिखूॅ
#Personal Thoughts #
पतझड़ में तुझे आस लिखूं,
या जीवन का कोई खास लिखूं?
सांसों की सौगात लिखूॅ
या बैगानों में अपना एहसास लिखूॅ?
अकेलेपन के जज्बात लिखूॅ
या भीड के ख्यालात लिखूं?
पतझड़ में तुझे आस लिखूं
या जीवन का कोई खास लिखूं?
दुनिया के बिखरे सवालात लिखूं?
या अंतरमन के जवाब लिखूं?
अपने दर्द में तुझे मरहम का एहसास लिखूं
या इस दुनिया में खुदा का एहसास लिखूं।
तुझे क्या लिखूं?
एस कलम का जज्बात लिखूं
या डायरी के पन्नो का राज लिखूं?
कविताओ का सार लिखूं
या गानो का अंदाज़ लिखूं?
एस दिल के तुझे पास लिखूं
या दूरियों का एहसास लिखूं?
पतझड़ में तुझे आस लिखूं
या जीवन का कोई खास लिखूं?
खामोशियो में सरसराहट लिखूं
या दिल की आवाज़ लिखूँ?
अँधेरे में रोशनी की बात लिखूँ
या उजालों के पास लिखूं?
अकेलेपन की याद लिखूं
या सबके संग का एहसास लिखूं?
पतझड़ में तुझे आस लिखूं
या जीवन का कोई खास लिखूं?
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Voice of heart आपके और मेरे दिल की आवाज ❤️
ठहराव (स्थिरता)
#Personal Thought#
"कहां से शुरू करूं ये कारवां,
हर कहानी अपना कुछ नया बयां करती है।"
स्थिरता पृथ्वी का एक गुण है, पृथ्वी जो हम सब का भार उठाये, बिना शिकायत के चुपचाप खड़ी रहती है। एक ठहराव उसे कभी उसके कर्तव्य पथ से हटने नहीं देता है। वो बिना किसी की परवाह किए अपना कर्म करती है।
मनुष्य प्रकृति के गुणों को लिए हुए ही इस पृथ्वी पर वास करता है, ये शरीर पृथ्वी, जल, वायु और आकाश से मिलकर बना है।। प्रकृति के सब गुणों में तारतम्यता जरूरी है, किसी एक गुण की अधिकता या कमी, हमारे जीवन को असंतुलित कर सकती है।
ठहराव जरूरी है इन्सान के लिए भी, जीवन की विडम्बनाए रास्ता रोकती है। जिन्दगी की जद्दोजहद मे एहसास और रिश्ते दोनो बिखरते है। धैर्य की कमी जीवन को दो राहों पर खडा कर देती है।
रिश्ते सम्भालना या जीवन के उतार चढाव के बीच अपने अस्तित्व को सम्भाल कर रखना। जड़त्व जीवन और बुद्धि को संकीर्ण कर देता है, स्थिरता धैर्य है, जड़त्व उससे कहीं अलग मनुष्य के मस्तिष्क को उसके नैसर्गिक गुणों से अलग कर देता है।
नैसर्गिक गुणो के बिना इस प्रथ्वी पर किसी का अस्तित्व नहीं बचता है।
जीवन बहुमुल्य है, ये मिला है जीये और जीने दे की अवधारण के साथ। किसी के अस्तित्व को मिटाने की चाह इंसान को उसके अपने अस्तित्व से अलग कर देती है।
जीवन का मोल जिसने नहीं समझा, उसकी ऊर्जा का एक बहुत बड़ा हिस्सा किसी की ऊर्जा को प्रबंधन करने में खर्च हो जाता है।
वो इस जीवन के उद्देश्यो से भटक जाता है।
ऊर्जा का सही प्रवाह बहुत जरूरी है,
यही पृथ्वी पर मनुष्य का दुःख है।
ये पृथ्वी शांत सबके दुख को अपने अंदर समाए हुए चुपचाप हर भार को झेलती है।
पृथ्वी की स्थिरता यहीं सिखाती है कि, जीवन को नियंत्रण करो लेकिन अपनी नैतिकता के बल पर।
किसी की ऊर्जा को जबरदस्ती नुकसान पहुंचाना एक घर्षण को जन्म देता है, जो सिर्फ जीवन के बहुमुल्य समय को व्यर्थ करना है।
किसी की सहायता करके ये हाथ बहुमुल्य हो सकते हैं, किसी को दुख पहुंचाकर ये हाथ गुनेहगार हो जाते हैं।
क्यो ना इन हाथों को किसी की मदद के लिए आगे बढ़ाएं, किसी के लिए दुआ करने के लिए आगे बढ़ाए।
किसी के लिए कुछ अच्छा करे वापस कोई चाह रखे बिना। ऐसा करके जीवन मे जो खुशी मिलती है उसका कोई विकल्प नहीं है।
यही इस पृथ्वी का संदेश है जो चुपचाप स्थिर रहकर हमें सिखाती है।
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आपके और मेरे दिल की आवाज
Voice of Heart ❤️
तेरा सांया
#Personal Thoughts#
मैं जहां जहां जाती हूं, तेरे सांयो को पाती हूं।
तू वक़्त तो नहीं है, फिर भी मेरे साथ हर जगह चलता है।
यूं हवाओं में खुशबू सी रहती है तेरी, जैसा ये आसमान ये ज़मीन हर शैं में तू बिखरा सा हो..
तेरी यादों के एहसास, तेरे अपनेपन की रुमानियत, तेरा होना ही जैसा जीवन हो।
मैं जहां-जहां भी जाती हूं, तुझको ही पाती हूं।
तू मेरा सांया है, या मेरा अच्छा वक़्त, जहाँ मैं होती हूँ।
वहां बस तू होता है. तू सांया है इन सांसो का, इन सांसो की रवानगी है।
तू जब जब होगा, वहां मैं रहूंगी तेरे संग, मैं जब जब रहूंगी वहां तू रहेगा मेरा जीवन बनके।
बारिश जब भी होगी, तुम्हें एकटठा करके हथेलियों में अपने पास रखने की एक कोशिश करूंगी..
तुम ढलती शाम की खामोशी में मुझे छूकर गुजर जाते हो।हर सुबह ओंस की बूंदो में तुम मुझे मिलते हो और खो जाते हो..तुम जब इस जीवन का अस्तित्व हो, फिर क्यों ये सांसारिक बंधन है।ये बंधन टूटते है आध्यात्म में।जहां तुम पूर्ण रूप से सिर्फ मेरे होते हो।जहां तुम्हारा और मेरा द्वैत का भाव मिट जाता है।आत्मा के पथ पर जिस्म से कोसों दूर तुम बस मेरे हो और मैं तुम्हारी..
#Writing #Passion# Feeling# Life#Evening#Waqt#Alonemess#Poems#Hearttouching
आपके दिल की आवाज़ मेरी कलम से।कुछ भाव जो छू ले दिल कोवो बीस मिनट
#Best Romantic Feelings#
वो जो कहता था, वो करता भी था। मै जो नहीं कहती थी, हमेशा वो ही करती थी।
उसको पागलपन पसंद नहीं थे, पर मुझे पागलपन करना पसंद था, अच्छा लगता था उसका मुझे पागल बुलाना।
वो बातें कहता नहीं था, और मैं चुप नहीं रह सकती थी, उसको चुपचाप से मुस्कुराना पसंद था और मुझे उसके चेहरे पर मुस्कान लाना।
उसके लिए मैं बेवकूफ हुआ करती थी, पर मेरे लिए वो दुनिया का सबसे होशियार इन्सान।
खुद में बहुत सारे मिथ थे, उसको लगता था दुनिया अपने हिसाब से चलती है, और मुझे लगता था हम दुनिया को बदल सकते है।
उसको पसंद नहीं था अपनी पिक क्लिक करना, पर मेरा सपना था उसकी स्माइल को कैमरे में कैद करके हमेशा के लिए अपने पास रखना।। वो मुस्कुराता हुआ बहुत अच्छा लगता था, मैं चाहती थी उसको हमेशा यूं ही मुस्कुराते हुए देखना।
उसको बन्धन पसंद नहीं थे, वो एक आज़ाद पंछी के जैसे उडना चाहता था, और मैं उसको अपने साथ बंधन में बांधना चाहती थी।
वो दुनिया देखना चाहता था, और मैं सिर्फ उसे।
कितने अलग थे हम दोनों, पर मुझे अच्छा लगता था उसका इस दुनिया में होना।
वो मुझसे दूर रहना चाहता था, और मैं हमेशा के लिए उसके पास।
प्यार नहीं करता था वो मुझसे, उसे ये कहना पसंद था, और मैं सुनना चाहतीं थी कि वो मुझसे प्यार करता है।
अजनबी थे हम दोनों सालों बाद भी उसको लगता था, अजनबी है। हम दोनों और मुझे लगता था मैं खुद से ज्यादा उसको जानती थी।
जिन्दगी के वो बीस मिनट, जिन्होंने मुझे एहसास कराया था, जिन्दगी में कल्पनाएं भी सच होती है।
वो अनजान शहर, जिसकी गलियों में गजल की लाइनें मेरे जेहन में गूंज रही थी, "हम तेरे शहर में आये है मुसाफ़िर की तरह, एक बार मुलाकात का मौका दे दे...."
उसको पसंद नहीं थी, मेरी फिल्मी बातें, वो हकीकत के धरातल पर जीता था और मुझे हवाओं में भी उसकी खुशबू महसूस होती थी।
उसको पसंद नहीं था मेरा बार बार परेशान होना, पर मुझे अच्छा लगता था परेशान होते रहना।
उसको यकीन नहीं होता था दुनिया में ऐसे भी लोग है, मेरी मौजूदगी ने उसको एहसास कराया था, मैं अपने तरह की एक ही थी।
वो चाहता था मैं मैच्योर हो जाऊं, और मैं उसके सामने बच्चा बनना चाहती थी। एक वो ही था, जिसने मेरे बचपन को जीवंत रखा था।
वो गलती से मिला था मुझे, और मेरे जीवन की वो सबसे खूबसूरत गलती थी। उसको पसंद था गलती से मिस्टेक सांग और मुझे पसंद था, गलती से मिस्टेक में उससे प्यार करना।
वो मुझे कभी डांटता नहीं था, क्योंकि उसको डांटना नहीं आता था, एकदम मासूम सा था, पर मैं उसके साथ शैतानी करती थी।
उसको शब्दों को उलझाना पसंद था और मुझे उलझकर उसके पास ही रह जाना।
उसके सपने ऊंचे थे, वो जिन्दगी जीना चाहता था, जिसके लिए जिन्दगी ये जवानी है दीवानी जैसी थी, और मैं सिर्फ उसे जीना चाहती थी। मेरे लिए जिन्दगी एक लव स्टोरी थी।
उसको बदतमीज दिल सांग पसंद था और मुझे"क्यों ना बोले मोसे मोहन, है क्यूं रूठे रूठे मोहन। "
वो आलसी था, उसको मस्त रहना अच्छा लगता था और मुझे स्वस्थ।
वो परवाह नहीं करता था अपनी और मैं हर पल उसकी परवाह करने को उसके साथ रहना चाहती थी।
वो खुद को तेज बोलता था, पर मुझे उसके जैसी मासूमियत किसी में नहीं दिखती थी।
वो मुझे दिखाना चाहता था, परवाह नहीं करता था मेरी, पर फिर भी परवाह करता था, वो खुद को बुरा कहता था, पर मुझे उससे अचछा कोई नहीं लगता था।
मीलों की दूरी उसको मुझसे जुदा किये थी, मेरे लिए उसका इस दुनिया में होना ही काफी था।
उसको परवाह नहीं थी मेरी, घंटों का सफर मैंने मिनटों में गुजारा था।
दिल चाहता था वो परवाह करें बस जरा सी। उसको बिल्कुल पसंद नहीं था मेरा पागलपन करना, पर मुझे यकीन होता था हर बार, वो मेरे हर पागलपन को सम्भाल लेगा।
वो सम्भाल लेता था मेरे फैलाये रायते को, शायद इसलिए मुझे वो सबसे ज्यादा पसंद था।
उसको प्यार नहीं था मुझसे, बस मेरे लिए मुझसे मिलने आया था।
शायद पिछले जन्म में उसे मुझसे प्यार था, इसलिए मेरी जिन्दगी में चला आया था।
वो अपना नहीं था मेरा, पर मेरे दिल ने उसे अपने सबसे करीब पाया था।
वो खुश रहना चाहता था और मैं भी उसको खुश ही देखना चाहतीं थी, हम दोनों में एक समानता थी।
वो मेरी सलामती की दुआएं करता था और मैं उसकी सलामती की दुआएं करती थी।
वो मुझको प्यार नहीं करता था, पर उसकी जिंदगी में मेरी मौजूदगी के कुछ क्षनं हमेशा रहेंगे, क्योंकि मैं उसको बहुत प्यार करती थी।
वो मेरा दिल दुखाना नहीं चाहता था, और मैं हमेशा उसका इंतज़ार करती रही, क्योंकि मुझे यकीन था, वो मुझसे प्यार करें या ना करें पर मेरा दिल नहीं दुखायेगा।
शायद यही प्यार था बस, जिसको वो मुझसे करता नहीं था और मैं बहुत करती थी।







