पुरुष तुम जैसे नहीं होते

 #Hindi Writer #

पुरुष, तुम जैसे नहीं होते हैं।
तुम सबसे अलग हो। तुम्हारा हृदय करुणा से भरा हुआ है।

क्या देखा कभी किसी पुरुष की आँख से प्रेम का आँसू टपकते?
पुरुषों का हृदय पत्थर जितना कठोर होता है,
जो पिघलना नहीं जानता।

पुरुष, तुम जैसे नहीं होते हैं।
मैंने देखा तुम्हें प्रेम में आँसू बहाते,
और देखा तुम्हारे हृदय की कोमलता को।
तुम्हें एक माँ की तरह परवाह करते हुए।

पुरुष बंजर ज़मीन से सूखे,
 सख़्त और ऊबड़-खाबड़ होते हैं,
जिन पर प्रेम के बीज गिरकर सूख जाते हैं,
वे कभी पनपते नहीं।

पुरुष, तुम जैसे नहीं होते हैं।
मैंने देखा तुम्हारे हृदय में प्रेम के पौधे को पनपते।
और तुम्हारी कोमलता में अपने दुःख के आँसू बहाते।
तुम्हारे हृदय की मिट्टी पर
ख़ुद को एक बच्चे की तरह बड़ा होते देखा मैंने।

पुरुष, तुम जैसे नहीं होते हैं।

उनके सख़्त हाथों की पकड़ अक्सर झकझोर देती है,
उनके अधिकार की सीमाएँ 
जीवन को संकुचित कर देती हैं,
उनके अहं में मैंने वजूद बिखरते देखे हैं।

पुरुष, तुम जैसे नहीं होते।

मैंने देखा तुम्हारे अपनेपन में
जीवन के भ्रम को टूटते हुए,
जीने के सलीके को बदलते हुए,
और तुम्हारे हाथ के कोमल स्पर्श से
जीवन के अहं को पिघलते हुए।

पुरुष, तुम जैसे नहीं होते हैं।
पुरुष, तुम जैसे नहीं होते हैं।

Alfaz aur khamoshi ke beech bikhre ehsaso ko kalambadh krne ki ek choti si koshish krti hun,Taki kisi gamgeen chehre pe muskan de skun.Ek shayar ki nazar se aapke dil ki aawaz,aur zindgi se smete huye ko aap tak pahuchane ka junun bs yahi jo aksar mujhe likhne ke liye majboor kr deta h.....

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