#Hindi Writer#
स्मृतियों के पटल पर
तुम्हारे होने के चिन्ह रूबरू अंकित हैं।
जैसे तुमने मुझे अपनाकर
मेरे अस्तित्व को ऊपर उठाया था।
मेरे हृदय की प्रार्थना बनकर
मेरे जीवन में दस्तक दी थी।
तुम्हारा आना कोई निश्चित घटना नहीं थी,
ये बस सौभाग्य था।
तुम किसी धार्मिक ग्रंथ में लिखे
इल्म जैसे थे।
तुम रूबरू अंकित हो गए थे मेरी रूह पर,
जैसे तुम थे।
तुम-सा न पहले कभी कोई देखा था,
न तुम-सा कभी कोई मिला था।
तुम बस तुम थे।
तुमने कभी कोई और बनने की कोशिश नहीं की।
तुम जैसे थे,
वैसे ही रहे मेरे सामने।
तुम्हारा होना
बस यही सार्थक रहा मेरे लिए।
तुम्हारे होने में
मैंने सबकुछ ढूँढ़ लिया,
और फिर कुछ और पाने की चाह नहीं रही।
तुम मेरे हृदय में
मंदिर की घंटी की ध्वनि-से
बजते रहे हमेशा।
मैंने जब भी
ख़ुद को तुममें देखा,
मुझे अपनी परछाईं नज़र आए तुम।
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