#Hindi Writer#
तुमने मेरा हाथ तब छोड़ा,
जब मुझे तुम्हारी सबसे ज़्यादा ज़रूरत थी।
जब आँसुओं की ठंडक से मेरा दिल जम गया था
और मैं चाहती थी
कि तुम्हारे हाथों की गर्माहट से
मैं खुद को थोड़ा गर्म रख सकूँ।
तुमने ज़िंदगी की मजबूरियों का वास्ता दिया
और आगे बढ़ गए।
मैं वर्षों तक तुम्हारे लौट आने की प्रतीक्षा करती रही।
और एक दिन, प्रतीक्षा करते-करते
मेरा प्रेम आँसुओं में बह गया।
तुम उन राहों पर फिर कभी नहीं लौटे।
मेरे आँसुओं की ठंडक में हम दोनों के एहसास
और तुम्हारे किए हुए वादे,
वक़्त की परत के नीचे कहीं दब गए—
जिन्हें मैं बरसों तक ढूँढ़ती रही,
लेकिन ढूँढ़ नहीं पाई।
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