#Personal Thought#
Life poetry
मौन में भी संवाद होता है,
जब “मैं” और “तुम” का भेद मिट जाता है।
जब हम किसी गहरी अनुभूति में उतरते हैं,
तुम मेरे अस्तित्व के द्रष्टा बन जाते हो।
जब शब्दों की आवश्यकता नहीं रहती,
अंतरमन की संवेदनाएँ
बिन कहे ही तुम तक पहुँच जाती हैं।
जब आत्मा और परमात्मा एक हो जाते हैं,
वहाँ न तुम रहते हो, न मैं…
बस एक शुद्ध अनुभव रह जाता है।
तुम मेरे सर्वस्व में समाए हुए,
मेरी आत्मा की शुद्धि बन,
एकांत में भक्ति-रस बरसाते हो।
जब तेरा-मेरा भेद शून्य हो जाता है,
और हम एक बिंदु बन
दिव्य ज्योति में विलीन हो जाते हैं…
तब मौन का यह संवाद
मुझे गहराइयों में तुम तक पहुँचा देता है।
फिर किसी वस्तु की चाह नहीं रहती,
और जीवन का उद्देश्य स्वयं सिद्ध हो जाता है।
क्योंकि सदियों से तुम तो तुम हो ही…
पर सत्य यह भी है—
मैं भी तो तुम ही हूँ।
तुम न हो तो मैं कहाँ…
तुम न हो तो मैं कहाँ…
#Night#Thoughts #Life quotes #Aadhyatam #Ishwar #Astitv #Soul #Connection #Zindgi #Life Thoughts #Diary #Personal thoughts #Prem #maun #Sanvad #khamoshi #Ehsas
#Voice of Your Heart # Zindgi ki Baate

