प्रेम और ईश्वर

# Spiritual Thoughts #

Life story


प्रेम और ईश्वर- 
प्रेम और ईश्वर दोनों एक जैसे हैं।
ये एक ही सिक्के के दो पहलू हैं।
प्रेम मनुष्य की आत्मा को मुक्त करता है और ईश्वर भी मोक्ष देता है।
ये एक ही स्वरूप के दो अंश हैं।
प्रेम को पाकर मनुष्य को सांसारिक चीजों की आवश्यकता नहीं रहती और वह आत्ममग्न हो जाता है, जैसे ध्यान की वह अवस्था जहाँ आत्मा परमात्मा को पाकर एक स्थिर अवस्था में पहुँच जाती है।
जब सांसारिकता से मोह हट जाता है, तब आत्मा को पूर्णता का अनुभव होता है।
प्रेम भी एक ऐसी ही अवस्था है।
जिसने इसे महसूस किया है, वही समझ सकता है कि यह अवस्था उस अवस्था से बिल्कुल अलग नहीं है।
ये एक ही सिक्के के दो पहलू हैं।
क्योंकि प्रेम और मोक्ष दोनों के लिए समर्पण चाहिए, जहाँ ‘मैं’ की उपस्थिति समाप्त हो जाती है, वहीं प्रेम और मोक्ष की शुरुआत होती है।
जहाँ अस्तित्व विलीन हो जाता है, जब ‘मैं’ बचता ही नहीं,
जब केवल ‘तुम’ का भाव रह जाता है।
जब दोनों मिलकर एक अवस्था में पहुँच जाते हैं, जब मिलन और समर्पण चरमोत्कर्ष पर होते हैं, तब केवल ‘तुम’ का भाव रह जाता है।
जो भी हो, तुम ही हो।
मैं हूँ ही नहीं, मैं भी तुम्हारा ही एक अंश हूँ।
मैं भी तुम हूँ और तुम भी मैं हो।
तब ‘हम’ नहीं रहता, क्योंकि ‘हम’ दो अस्तित्व को दर्शाता है,
और ‘मैं’ या ‘तुम’ केवल एक को।
यह एक बहुत गहन विषय है।
इस पर जितने लेख लिखे जाएँ, उतने कम हैं, जितने शब्द कहे जाएँ, उतने कम हैं।
इसे शब्दों में व्यक्त कर पाना कठिन है, क्योंकि यह एक अनुभव है।
जो इसकी गहराई तक गया हो, वही समझ सकता है कि प्रेम और ईश्वर एक हैं।
इस अवस्था में पहुँचने के बाद बाकी कुछ मायने नहीं रखता।
चीजें घटित होती रहती हैं, जीवन चलता रहता है, लेकिन वह अवस्था बदलती नहीं है।
दुनिया जिसे पागलपन समझती है, वह वास्तव में एक अवस्था होती है,
क्योंकि बिना पागलपन के ‘मैं’ का भाव समाप्त नहीं होता।
और ‘मैं’ के समाप्त हुए बिना न प्रेम हो सकता है और न ही ईश्वर को पाया जा सकता है।
जीवन के पड़ाव में हम बहुत सी अवस्थाओं से गुजरते हैं, लेकिन यह एक ऐसी अवस्था है जिसमें जाने के बाद पूर्णता का अनुभव हो जाता है और जीवन का अंतिम उद्देश्य पूर्ण लगता है।
जिस अवस्था में हम इस संसार को त्याग भी दें, तो लगता है कि आत्मा मुक्त हो गई,
क्योंकि चरमोत्कर्ष पर प्रेम और मोक्ष एक ही सिक्के के दो पहलू हैं।

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Alfaz aur khamoshi ke beech bikhre ehsaso ko kalambadh krne ki ek choti si koshish krti hun,Taki kisi gamgeen chehre pe muskan de skun.Ek shayar ki nazar se aapke dil ki aawaz,aur zindgi se smete huye ko aap tak pahuchane ka junun bs yahi jo aksar mujhe likhne ke liye majboor kr deta h.....

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